सरायरंजन (समस्तीपुर) सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बरबट्टा पंचायत के वार्ड संख्या-7 स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र की तस्वीरें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। जिस भवन का उपयोग मरीजों के इलाज, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए होना चाहिए, वहां अनाज का भंडारण किया गया है। यह दृश्य न केवल सरकारी संपत्ति के उपयोग पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति भी उजागर करता है। यदि एक सरकारी स्वास्थ्य उपकेंद्र ही अपने मूल उद्देश्य से भटक जाए, तो स्थानीय लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिलेंगी? आखिर किसकी जिम्मेदारी है कि ऐसे सरकारी संस्थानों की नियमित निगरानी हो? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है? ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य उपकेंद्र का उपयोग लंबे समय से इलाज के बजाय अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की जाती है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि स्वास्थ्य उपकेंद्र का उपयोग नियमों के विरुद्ध किया जा रहा है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए तथा इस भवन को तत्काल उसके मूल उद्देश्य—ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने—के लिए संचालित किया जाए। सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य मरीजों का उपचार है, अनाज का भंडारण नहीं। यदि ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह केवल एक भवन का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल बन जाता है। Post navigation मित्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड योगिक साइंस में CMS & ED एवं DMLT की परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न मुसरीघरारी में रविवार को पैदल मार्च को लेकर युवाओं की हुई बैठक