नई दिल्ली/पुणे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन ने देशभर में चर्चा बटोर ली है। “कॉकरोच जनता पार्टी” (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान अब दिल्ली से निकलकर महाराष्ट्र सहित कई राज्यों तक पहुंचने की तैयारी में है। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया। आंदोलनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी। अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक की हुंकार!दिल्ली के बाद महाराष्ट्र से शुरू हुआ बड़ा आंदोलन इस आंदोलन को बड़ा समर्थन तब मिला जब प्रसिद्ध शिक्षा एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक खुलकर इसके समर्थन में सामने आए। वांगचुक ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें न्याय और जवाबदेही भी जरूरी है। उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ मंच साझा किया और शिक्षा सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। दिल्ली प्रदर्शन के बाद अभिजीत दीपके ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद महाराष्ट्र के पुणे से राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की गई, जहां छात्रों और युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। महाराष्ट्र में आंदोलन के विस्तार को लेकर दीपके ने कहा कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग करने वाला जनअभियान है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में देश के कई बड़े शहरों में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन अब जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह अभियान कितना प्रभाव डालता है, इस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। Post navigation बिहार से लेकर दिल्ली तक सियासी घमासान, “सीट चोरी” के आरोपों से गरमाई राजनीति क्या पवन सिंह बनेंगे बिहार सरकार में मंत्री? MLC बनने के बाद सियासी अटकलें तेज