Screenshot

नई दिल्ली। देश की राजनीति में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा पर विपक्षी नेताओं को तोड़ने तथा राजनीतिक दलों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और कथित “सीट चोरी” जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस का आरोप है कि विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के नेताओं को दबाव में लाकर पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वहीं भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है और विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक निराशा का परिणाम बता रही है।  

इधर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी चर्चा में है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस के संभावित गठबंधन या विलय को लेकर चल रही अटकलों के बीच कांग्रेस ने ऐसे सभी दावों को “पूरी तरह बेबुनियाद” बताया है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी दलों में टूट कराने का आरोप लगाया है।  

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 और आगे होने वाले चुनावों को देखते हुए देश में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। विपक्ष महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सत्तापक्ष विकास और बुनियादी ढांचे के कार्यों को प्रमुखता से जनता के बीच रख रहा है।  

आने वाले महीनों में संसद, राज्यों की राजनीति और विपक्षी दलों की रणनीतियां भारतीय राजनीति का रुख तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में देश की राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।