नई दिल्ली/तेहरान। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य टकराव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल एवं ड्रोन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और इसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। जानकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, रडार सिस्टम और निगरानी केंद्रों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर हुए हमलों के जवाब में की गई। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। युद्ध का सबसे बड़ा असर तेल आपूर्ति पर पड़ रहा है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आवाजाही जिस होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होती है, वह क्षेत्र अब तनाव के केंद्र में है। किसी भी प्रकार की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ता है, जहां पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए चिंता की एक और वजह खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीय हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों के हताहत होने और कई भारतीयों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। भारतीय दूतावास लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इस संघर्ष ने केवल अमेरिका और ईरान को ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में भी मिसाइल हमलों और सुरक्षा अलर्ट की खबरें सामने आई हैं। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है, जबकि समुद्री व्यापार और तेल परिवहन पर भी असर देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजारों में भी इस युद्ध का असर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में तेजी, शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत में रुपये पर भी दबाव देखा गया है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो महंगाई बढ़ने की आशंका और गहरी हो सकती है। हालांकि एक तरफ सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ युद्धविराम और समझौते की कोशिशें भी चल रही हैं। लेकिन जमीनी हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होंगे या यह संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। Post navigation फीफा वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच शुरू, दुनिया की नजरें महाकुंभ पर रोशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की नेपाल के होटल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, जांच में जुटी नेपाल पुलिस